हरिद्वार महाकुंभ में आज सोमवती अमावस्या का दूसरा शाही स्नान है.इस शाही स्नान में सभी 13 अखाड़े शामिल होंगे.आपको बता दें कि इससे पहले महाशिवरात्रि के मौके पर पहला शाही स्नान हुआ था जिसमें केवल सात संन्यासी अखाड़ों ने ही स्नान किया था.महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाने के लिए देश विदेश से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे हुए हैं.हरिद्वार प्रशासन ने भी दूसरे शाही स्नान के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की हुई है.शाही स्नान के लिए अखाड़ों और महामंडलेश्वरों के शाही जुलूस के मार्ग को भी बदला गया है. अब शाही जुलूस अपर रोड के बजाय हाइवे से मेला भवन (CCR) होते हुए हरकी पैड़ी पहुंचेगा.
12 और 14 अप्रैल के शाही स्नान पर आम आदमी हरकी पैड़ी के घाटों पर डुबकी नहीं लगा पाएंगे. हरकी पैड़ी क्षेत्र संतों के स्नान के लिए आरक्षित होगा.बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को पार्किंग स्थलों के नजदीक बने घाटों पर ही स्नान करवाया जाएगा. महाकुंभ मेला प्रशासन के मुताबिक शाही स्नान के लिए पहला जुलूस श्रीपंचायती अखाड़ा निरंजनी का निकलेगा. आनंद अखाड़ा भी उसके साथ रहेगा. निरंजनी के बाद श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा स्नान करेगा. जूना के साथ अग्नि व आह्वान अखाड़े के अलावा किन्नर अखाड़ा भी पहुंचेगा. अगले क्रम में महानिर्वाणी अखाड़ा स्नान करेगा और उसके साथ अटल अखाड़ा भी होगा.जिसके बाद तीनों बैरागी अणियां हरकी पैड़ी पहुंचेंगी. उनके 18 अखाड़े और करीब 1200 खालसे जुलूस में शामिल होंगे. बैरागियों के बाद दोनों उदासीन अखाड़े बड़ा एवं नया का जुलूस होगा और आखिर में निर्मल अखाड़ा स्नान के लिए पहुंचेगा.
महाशिवरात्रि के मौके पर हुए स्नान के समय अखाड़ों और उनके साधु-संतों की संख्या कम थी, लेकिन इस बार संख्या बढ़ गई है. इसलिए स्नान के देर रात तक चलने की संभावना है. सोमवती अमावस्या होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे हुए हैं.सोमवती अमावस्या पितृ कार्यों के साथ भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करने के लिए महत्वपूर्ण होती है.आपको बता दें कि 30 अप्रैल तक चलने वाले महाकुंभ में गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं को कोविड-19 की 72 घंटे पहले तक की आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट दिखानी पड़ रही है. कोरोना महामारी के चलते अब शासन-प्रशासन सख्त है.